एस्किमो जनजाति

एस्किमो जनजाति

 एस्किमो जनजाति      



परिचय - एस्किमो का शाब्दिक अर्थ ’कच्चा माँस खाने वाला ’ है। यह जनजाति मंगोल प्रजाति से सम्बन्धित है।

  1. शारिरीक संरचना-  इनका चेहरा सपाट व चैडा, त्वचा का रंग पिलापन लिए हुए भूरा, बाल-भद्दे व काले, कद-मझला, नाक-चपटी, आखे-गहरी, कत्थई व तिरछी होती है। इनका जबडा भारी, मुँह-चैडा तथा दाँत-सफेद व मजबूत होते है। यह स्वभाव से सरल व हँसमुख प्रकृति के लोग है।
  2.  निवास क्षेत्र-  यह जनजाति प्रारम्भ से हि आर्कटिक व टुण्ड्रा प्रदेशो तक ही सिमित है। यह अलास्का, कनाडा, ग्रनलैण्ड व उत्तरी साइबेरिया क्षेत्रो मे रहते है।इन प्रदेशो मे जाडे की ऋतु बहुत लम्बी व ग्रीष्म ऋतु बहुत छोटी होती है। इन क्षेत्रो का वार्षिक तापमान 00 सैल्शियस से भी कम होता है। इन क्षेत्रो मे वर्षा हिम के रूप मे होती है। कठोर जलवायु के कारण वनस्पति का अभाव रहता है।
  3. आर्थिक क्रिया-कलाप-
    • आखेट- शिकार करना एस्किमो के जीविकोपार्जन का एक मात्र साधन है। आखेट को 2 भागो मे बाँटा गया है-
      • शीतकालीन आखेट
      • बसन्तकालीन आखेट
    • शीतकालीन आखेट-       शीतकालीन आखेट 2 विधियो से किया जाता है-
      • माउपाक विधि
      • इतुरपाक विधि

    • माउपाक विधि-     माउपाक का अर्थ ’प्रतिक्षा करना’ होता है। इस विधि मे शीतकालीन ऋतु मे एस्किमो समुद्री तट के किनारे सील मछली का शिकार करते है। जब मछली बर्फ मे बने छिद्रो म श्वास लेने आति है तब एस्किमो द्वारा रखी हड्डी कि छड हिल जाती है और एस्किमो अपने हथियार हारफून से सील मछली का शिकार करते है जिसे माउपाक विधि कहते है।  
    • इतुरपाक विधि-     इस विधि के अन्तर्गत शिकारियो द्वारा 2 छिद्र बनाए जाते है। एक छिद्र मे एक व्यक्ति सील को चारा डालकर बुलाता है तथा दुसरे छिद्र मे दूसरा व्यक्ति संकेत मिलते हि हारफून से शिकार करता है।
  • बसन्तकालीन आखेट-      मार्च मे सील मछलिया श्वास लेने हेतु बाहार आकार धूप सेकने लगती है। बसन्तकालीन आखेट को उत्तोक कहते है। इस ऋतु मे चमडे से बनी नाव को परिवहन के लिए काम मे लेते है जिसे कयाक कहते है। ग्रिष्मकाल मे एस्किमो लोग कैरिबो (बारह सिंगा) का धनुष बाण से शिकार करते है।
    • सील मछली के लाभ -
      • सील मछली से खाने के लिए माँस,
      •  कपडे बनाने के लिए खाल, 
      • तम्बू बनाने के लिए खाल, 
      • ईधन के लिए चर्बी, 
      • स्लेज गाडी बनाने के लिए हड्डियाँ
      • धागे के रूप मे ताॅत प्राप्त होती है।
  • भोजन-  इनका प्रमुख भोजन कच्चा माँस है। यह छोटी मछलीयो व स्थलीय जीव-जन्तुओ से भी भोजन प्राप्त करते है। इनके भोजन का स्त्रोत सील, व्हेल, सी लाॅयन है।
  • वस्त्र-   एस्किमो के वस्त्र कैरिबो कि खाल से बने होते है तथा द्रुवीय भालू कि खाल से ’समूर’ नामक वस्त्र बनाए जाते है। स्त्री व पुरूषो के वस्त्र एक समान होते है। एस्किमो जर्सीनुमा बाहेदार वस्त्र पहनते है जिसे ’तिमियाक’ कहते है। तिमियाक के ऊपर पहने जाने वाले वस्त्र को ’अनोहक’ कहते है। सील मछली की खाल से बने जूतो को ’कार्मिक या मुक्लूक्स’ कहते है।
  • निवास गृह-  इनके मकान बर्फ, पत्थर, हड्डियाँ तथा खाल के बने होते है। शीतकाल मे बर्फ के मकान को ’इग्लू’ कहते है। 5 से 6 फीट भूमिगत तथा 2 से 3 फीट ऊपर उठे हुए लकडी व व्हेल मछली की हड्डियो के ढाँचे से बने मकानो को ’कर्मक’ कहते है। ग्रिष्मकाल मे यह लोग अस्थायी तम्बू मे रहते है।
  • यंत्र व उपकरण-
    • कयाक- कयाक चमडे से बनी एक प्रकार कि नाव है जो 5 मीटर लम्बी व 1ण्5 मीटर चैडी होती है।
    • ऊमियाक- ऊमियाक एक बडी नाव है जो व्हेल मछली के शिकार के दौरान काम मे लि जाती है।
    • हारफून-  सील मछली के शिकार के लिए प्रयुक्त 1ण्2 से 1ण्5 मीटर लम्बा भालानुमा हथियार जो रस्सी से बंधा होता है।
    • स्लेज - बर्फ पर चलने वाली पहिये विहिन गाडी जिसे कुत्ते व रेण्डियर खिचते है। 
4. समाज व संस्कृति-  ये लोग छोटे-छोटे समुहो मे रहते है। इनका समाज पितृवंशीय समाज है। इनका जीवन घुमक्कड है। इनमे बहुपत्नी प्रथा प्रचलित है। ग्रीष्मकाल मे यहाँ कई उत्सव व समारोह मनाए जाते है। यह लोग जादू-टोनो मे भी विश्वास रखते है। ये लोग ’एल्युट’ भाषा बोलते है। भोजन की कमी होने पर बूढे व अशक्त व्यक्ति आत्महत्या करते है। 

5. वातावरण समायोजन -    यह कठोर जलवायु मे निवास करते है। यह हिम का प्रयोग करके हिम निवास (इग्लू) बनाते है। हिम झंझाओ तथा हिम पर सूर्य की किरणो के पडने से होने वाली चमक से आँखो को बचाने के लिए आँख कवच का प्रयोग करते है।
6. आधुनिक संस्कृति से सम्पर्क-         इनका यूरोपियन व अमेरिकन लोगो से सम्पर्क बडा है। अब यह लोग आग्नेय अस्त्रो व बन्दूक का प्रयोग करने लगे है। कयाक के स्थान पर मोअर चालित नाव व स्लेज के स्थान पर स्नो स्कूटर का प्रयोग करते है। इनकी संख्या मे वृध्दी से टुण्ड्रा के तटीय क्षेत्रो के पर्यावरण पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पडा है।

मानचित्रः एस्किमो व बुशमैन जनजाति के निवास क्षेत्र




























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